हम जैसे साहित्य पढ़ते है वेसे हि विचार हमारे मन में  उठते हैं  और उन्ही से हमारा सारा व्यवहार प्रभावित होता है | जो लोग विकारी और गंदे साहित्य पढ़ते हैं वे कभी ऊपर नहीं उठ सकते | जितने भी महापुरुष हुए हें उनके जीवन में सत्साहित्य का ही छाप मिली है |                                                                                                       कोई कितना भी भयभीत हो निरास हो उसके लिए सत्साहित्य टॉनिक का काम करता है | ये सब बातें बापूजी के साधकों को पता होती है इसलिए  सत्साहित्य की सेवा करने  में देर नहीं लगाते , जव भी उनको मौका मिलता हे वे सेवा करने पहूँच जाते हैं…..

 

सत्साहित्य सेवा की कुछ तस्वीरें….

निजामवाद , हैदराबाद

चामुंडी देवस्थान , मैसूर

नचावाद , हैदराबाद

उप्पाल , हैदराबाद