Contribution

“वसुधैव कुटुम्बकम्”

की भावना से ओतप्रोत हृदय​

पिछले 60 से अधिक वर्षों से सनातन वैदिक संस्कृति का शंखनाद करने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण,
व्यक्ति निर्माण व सामाजिक मूल्यों द्वारा समाज-निर्माण में सेवारत रहे हैं संत श्री आशारामजी बापू ।


“>”>विश्व धर्म संसद, शिकागो

4 सितम्बर 1993

“>”>हिन्दू संस्कृति का परचम लहराने पार्लियामेंट ऑफ वर्ल्ड रिलीजन्स (विश्व धर्म संसद),शिकागो में भारत का नेतृत्व 11 सितम्बर 1893 को स्वामी विवेकानंदजी ने और ठीक उसके 100 साल बाद 4 सितम्बर 1993 को संत श्री आशारामजी बापू ने किया था ।

Bhopal