MAHILA UTHTHAN MANDAL

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ब्रह्मसंदेश :-

नारी शरीर मिलने से अपने को अबला मानती हो ? लघुताग्रंथि में उलझकर परिस्थितियों में पीसी जाती हो ? अपना जीवन-दीन बना बैठी हो ? तो जागो, उठो…. अपने भीतर सोये हुए आत्मबल को जगाओ । सर्वदेश, सर्वकाल में सर्वोत्तम आत्मबल को अर्जित करो । आत्मा-परमात्मा में अथाह सामर्थ्य है । अपने को दीन-हीन अबला मान बैठी तो जगत में ऐसी कोई सत्ता नहीं है जो तुम्हें ऊपर उठा सके । अपने आत्मस्वरूप में प्रतिष्ठित हो गयी तो तीनों लोकों में भी ऐसी कोई हस्ती नहीं जो तुम्हें दबा सके ।

सेवाकार्य…….

चले स्व की और

तेजस्विनी भव अभियान

दिब्य शिशु गर्भा संस्कार

गर्भपात रोको अभियान

अध्यात्मिक जागरण अभियान

रक्षाबंधन कार्यक्रम

कैदी उत्थान कार्यक्रम

नारा सेवा नारायणा सेवा

उद्देश्य…….

  • महिलाओं को सफलता के सूत्र बताकर उन्नति के पथ पर अग्रसर करना ।
  • ब्रह्मवेत्ता संत-महापुरुषों के सत्संग एवं सत्शास्त्रों के स्वाध्याय द्वारा विवेक-जागृति।
  • माताओं द्वारा बच्चों में गर्भकाल एवं शिशुकाल से ही सुसंस्कारों का सिंचन कराके उन्नत एवं प्रतिभासम्पन्न भावी पीढ़ी का निर्माण ।
  • महिलाओं को पारिवारिक उन्नति का मार्गदर्शन देकर परिवार में सुख-शांतिमय वातावरण का निर्माण करना ।
  • भ्रूणहत्या (गर्भपात), सिजेरियन डिलीवरी जैसी सामाजिक कुरीतियों का समाज से उन्मूलन ।
  • जीवन को ओजस्वी-तेजस्वी बनाने हेतु मार्गदर्शन ।
  • भगवत्प्राप्त ऋषि-मुनियों, संतों द्वारा प्रणीत भारतीय संस्कृति की सर्वहितकारी परम्पराओं की महिमा का प्रचार-प्रसार ।