क्या कहते हैं अधिवक्ता ?

क्या कहते हैं अधिवक्ता ?

भारत के पूर्व कानून एवं न्यायमंत्री सुब्रमण्यम स्वामी

21वीं सदी का सबसे बड़ा अन्याय..
सार बात यह है कि आशाराम बापू के खिलाफ बलात्कार का फर्जी मामला है । लगभग 85 वर्ष की उम्र में जब उनकी अपील उच्च न्यायालय में लम्बित है तो उन्हें जमानत देने से इन्कार करना मानवाधिकार और कानून की आपराधिक अवहेलना है ।

अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय अश्विनी उपाध्याय

मैं जज साहब से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूँ..

सामान्य अपराधियों को नहीं, बड़े-बड़े माफियाओं को, आतंकवादियों को, जिन्होंने करोड़ों की हेराफेरी की है ऐसे सफेदपोश अपराधियों को, नशा-तस्करों को… किन-किनको जमानत मिल जाती है लेकिन संत आशारामजी को आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, यौगिक चिकित्सा से अपना इलाज कराने की छूट नहीं मिल रही है यह कितने आश्चर्य की बात है ! आतंकवादियों के ऊपर मानवता की दुहाई देकर काम हो रहा है तो आशारामजी का तो वास्तव में मानवाधिकार है । मैं जज साहब से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूँ.. उनको कम-से-कम इलाज तो कराने दीजिये !

अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय हरिशंकर जैन

आशारामजी बापू एक षड्यंत्र के शिकार हुए हैं..

मैंने FIR देखी है, मेडिकल रिपोर्ट देखी है, जो बयान हुए हैं; उनको पढ़ा है । उसके आधार पर मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि केस बिल्कुल बनावटी है, केस में फँसाया गया है ।

अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय विष्णुशंकर जैन

आने वाला समय बतायेगा..

आनेवाले समय में यह बात समाज के सामने आयेगी कि संत आशाराम बापू का केस झूठा था । उनको जो सजा दी गयी वह गलत थी । मीडिया या हिन्दू-विरोधी लोगों द्वारा एक माहौल बनाया जाता है कि हमारे संत ऐसी-ऐसी चीज में शामिल हैं ।

अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय ए. पी. सिंह

उन्हें न्याय नहीं मिल पाया..

कोरोना काल में सबको छोड़ा गया, बड़े-बड़े हार्डकोर क्रिमिनल्स को छोड़ा गया, हाईपावर कमेटी, मा.सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन थी, ऑनरेबल हाईकोर्ट की गाइडलाइन थी लेकिन बापू आशारामजी को नहीं छोड़ा गया और आप बात करते हैं जस्टिस फॉर ऑल !